मीन संक्रांति  

मीन संक्रांति (Meena Sankranti) का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। सूर्य जब मीन राशि में परिभ्रमण करता है, तब यह अवस्था सूर्य की मीन संक्रांति कही जाती है। सूर्य का जब-जब गुरु की राशि धनु व मीन में परिभ्रमण होता है अथवा धनु व मीन संक्रांति होती है, वह मलमास (खरमास) कहलाती है। मलमास में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। भक्ति, साधना व उत्सव का क्रम जारी रहता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मलमास में नामकरण, विद्या आरंभ, कर्ण छेदन, अन्नप्राशन, चौलकर्म, उपनयन संस्कार, विवाह संस्कार, ग्रह प्रवेश तथा वास्तु पूजन आदि मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।[1] *सूर्य की मीन संक्रांति में भले ही मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है, किंतु भक्ति का क्रम जारी रहता है।

पूजा विधि

मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती आदि पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। इस दिन वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन प्रातः सूर्योदय के समय किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय सूर्य देव को नमस्कार करें और उनसे अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। इस दिन मंदिर जाकर भगवान् के दर्शन करें अथवा घर पर ही धूप, दीपक, फल, फूल, मिष्ठान आदि से भगवान् का पूजन करें। इसके पश्चात् ज़रूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।

इस दिन भूमि का दान करना विशेष रूप से शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रायः सभी मंदिरों को फूलों से बड़ी ही सुंदरता से सजाया जाता है और दीप जलाये जाते हैं। इस दिन किये गए दान और पुण्य कर्मों से सभी जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। देश भर के विभिन्न हिस्सों में, विशेष रूप से ओडिशा में मीन संक्रांति का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सूर्य का मीन राशि में प्रवेश (हिन्दी) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 12 मार्च, 2015।

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