धनु संक्रान्ति  

धनु संक्रान्ति (Dhanu Sankranti) को हेमंत ऋतु शुरू होने पर मनाया जाता है। दक्षिणी भूटान और नेपाल में इस दिन जंगली आलू जिसे 'तारुल' के नाम से जाना जाता है, उसे खाने का रिवाज है। जिस दिन से ऋतु की शुरुआत होती है उसकी पहली तारीख को लोग इस संक्रांति को बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं। धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने का बहुत महत्व है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों के जल में स्नान करने से मनुष्यों के द्वारा किये गये बुरे कर्म या पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस दिन पूजा करने से भविष्य सूर्य की भांति चमक उठता है।

महत्त्व

भारतीय पंचांग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में संक्रांति करते हैं तो यह समय शुभ नहीं माना जाता है। कहा जाता है की जब तक सूर्य मकर राशि में संक्रमित नहीं होते तब तक किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचांग के अनुसार यह समय सारे पौष मास का होता है, जिसे खरमास कहा जाता है। इस माह की संक्रांति के दिन गंगा-यमुना स्नान का महत्व माना जाता है। पौष संक्रांति के दिन श्रद्धालु नदी किनारे जाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। माना जाता है कि इस विधि को करने से स्वयं के मन की शुद्धि होती है। बुद्धि और विवेक की प्राप्ति के लिए भी इस दिन सूर्य पूजन किया जाता है। सूर्य किसी विशेष राशि में प्रवेश करता है, इसी कारण से इसे संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान को मीठे पकवानों का भोग लगाया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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