अमिताभ बच्चन  

अमिताभ बच्चन विषय सूची
अमिताभ बच्चन
पूरा नाम अमिताभ हरिवंश श्रीवास्तव
अन्य नाम बिग बी, शहंशाह ऑफ़ बॉलीवुड, एंग्री यंग मैन, स्टार ऑफ़ द मिलेनियम
जन्म 11 अक्टूबर, 1942
जन्म भूमि इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
अभिभावक हरिवंश राय बच्चन, तेजी बच्चन
पति/पत्नी जया भादुड़ी बच्चन
संतान अभिषेक बच्चन, श्वेता नंदा
कर्म भूमि मुंबई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, फ़िल्म निर्माता, पार्श्व गायक
मुख्य फ़िल्में सात हिन्दुस्तानी, ज़ंजीर, दीवार, अमर अकबर एंथनी, शोले, मुकद्दर का सिकंदर, अग्निपथ (1990), हम, चीनी कम, ब्लैक, पा, पीकू आदि
शिक्षा एम. ए.
विद्यालय ज्ञान प्रबोधिनी, बॉयज़ हाई स्कूल (बी.एच.एस.), शेरवुड कॉलेज, नैनीताल, किरोड़ीमल कॉलेज, दिल्ली
पुरस्कार-उपाधि पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार, एक बार सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार
प्रसिद्धि अमिताभ बच्चन सहस्त्राब्दी के महानायक कहे जाने वाले अभिनेता हैं।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी इंटरनेट पर हुए एक सर्वेक्षण में सहस्त्राब्दी का सर्वाधिक लोकप्रिय एशियाई व्यक्ति चुने जाने के बाद लंदन के विख्यात संग्रहालय, 'मैडम तुसाद वैक्स म्यूज़ियम' में अमिताभ बच्चन का मोम प्रतिरूप रखा गया।
बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक ब्लॉग
अद्यतन‎

अमिताभ बच्चन (अंग्रेज़ी:Amitabh Bachchan, जन्म: 11 अक्टूबर, 1942 इलाहाबाद) भारतीय सिनेमा के महान् सितारे, जो चार दशक से भी अधिक समय से हिन्दी फ़िल्म उद्योग पर छाये हुए हैं। अमिताभ बच्चन सहस्त्राब्दी के महानायक कहे जाते हैं। अभिनय के अतिरिक्त अमिताभ बच्चन पार्श्वगायक, फ़िल्म निर्माता और टी.वी. प्रस्तुतकर्ता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य के रूप में भी जाने जाते हैं। अमिताभ 1970 के दशक में बॉलीवुड सिनेमा के एंग्री यंग मैन कहलाए और भारतीय फ़िल्म इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण शख़्सियत बन गए। 40 साल बाद भी आज बॉलीवुड में उनके क़द के सामने कोई नहीं है। आज भी वे बॉलीवुड के सबसे व्यस्त अभिनेताओं में गिने जाते है। प्रारम्भ में जिस आवाज़ के कारण निर्देशकों ने अमिताभ को अपनी फ़िल्मों से लेने को मना कर दिया था, वही आवाज़ आगे चलकर उनकी विशिष्टता बन गयी।

जीवन परिचय

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश राज्य में हुआ था। हिन्दी काव्य में 'हालावाद के प्रवर्तक' और अमिताभ के पिता हरिवंशराय और उनका परिवार अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति का था और उनके घर में रामचरित मानस तथा श्रीमद् भगवत् गीता का नियमित पाठ होता था। संस्कारवश स्वयं अमिताभ भी गीता - रामायण का नियमित पारायण करते हैं।
अमिताभ बच्चन
अमिताभ की माता श्रीमती तेजी बच्चन जन्म से सिख थीं, लेकिन वे भी हनुमानजी की अनन्य भक्त थीं। कवि बच्चन से 'तेजी सूरी' का विवाह जनवरी 1942 में ही हुआ था और उसी साल उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हो गई। तेजी से कवि बच्चन का दूसरा विवाह हुआ था। अमिताभ, हरिवंश राय बच्चन के दो बेटों में सबसे बड़े हैं। उनके दूसरे बेटे का नाम अजिताभ है। इनकी माता की थिएटर में गहरी रुचि थी और उन्हें फ़िल्म में भी रोल की पेशकश की गई थी, किंतु उन्होंने गृहणी बनना ही पसंद किया। अमिताभ के कैरियर के चुनाव में इनकी माता का भी योगदान है, क्योंकि वह हमेशा इस बात पर भी ज़ोर देती थी कि उन्हें 'सेंटर स्टेज' को अपना कैरियर बनाना चाहिए। बच्चन के पिता का देहांत 2003 में हो गया था। उनकी माता का निधन 21 दिसंबर, 2007 को हुआ था।

बचपन

सन 1942 की जिन सर्दियों में अमिताभ बच्चन का जन्म हुआ, बच्चन दंपति इलाहाबाद में 'बैंक रोड' पर मकान नंबर 9 में रहता था। कविवर सुमित्रानंदन पंत भी सर्दियों में अल्मोड़ा छोड़कर इलाहाबाद आ जाते थे। वे बच्चन जी के घर के निकट रहते थे। नर्सिंग होम में पंत जी ने नवजात शिशु की तरफ़ इशारा करते हुए कवि बच्चन से कहा था- "देखो तो कितना शांत दिखाई दे रहा है, मानो ध्यानस्थ अमिताभ।" तभी बच्चन दंपति ने अपने पुत्र का नाम 'अमिताभ' रख दिया था।

जब जीवनदीप जला

अमिताभ बच्चन के जन्म पर उनके पिता प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन ने एक कविता लिखी जो इस प्रकार है-

फुल्ल कमल,
गोद नवल,
मोद नवल,
गेहूं में विनोद नवल।
बाल नवल,
लाल नवल,
दीपक में ज्वाल नवल।
दूध नवल,
पूत नवल,
वंश में विभूति नवल।
नवल दृश्य,
नवल दृष्टि,
जीवन का नव भविष्य,
जीवन की नवल सृष्टि

इंकलाब राय

बच्चन जी के एक प्राध्यापक मित्र 'अमरनाथ झा' ने सुझाव दिया था कि भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि में जन्मे बालक का नाम 'इंकलाब राय' रखना बेहतर होगा, इससे परिवार के नामकरण शैली की परंपरा भी क़ायम रहेगी। झा ने इसी तरह बच्चन जी के दूसरे पुत्र अजिताभ का नाम देश की आज़ादी के वर्ष 1947 को देखते हुए 'आज़ाद राय' रखने का सुझाव दिया था। लेकिन पंत जी ने कहा था- "अमिताभ के भाई का नाम तो 'अजिताभ' ही हो सकता है।" कालांतर में माता-पिता के लिए अमिताभ सिर्फ़ 'अमित' रह गया और उनकी माता उन्हें 'मुन्ना' कहकर पुकारती थीं। तेजी जी की बहन 'गोविंद' ने अजिताभ का घरेलू नाम 'बंटी' रखा।

बचपन में मिली सीख

ढाई साल की उम्र में अमिताभ लाहौर रेलवे स्टेशन पर अपने माता-पिता से बिछड़कर ओवरब्रिज पर पहुँच गए थे, जब वे अपने नाना के घर मीरपुर जा रहे थे। बच्चन दंपति ने पहली बार अपने बेटे को सीख दी थी कि माता-पिता को बताए बगैर बच्चों को कहीं नहीं जाना चाहिए। इस बिछोह के समय तेजी टिकट लेने गई थीं और अमित पिता का हाथ छूट जाने से भीड़ में खो गए थे। मीरपुर में अपने नाना खजानसिंह के लंबे केश देखकर अमित को पहली बार आश्चर्य हुआ था कि ये औरतों जैसे लंबे बाल क्यों रखते हैं। लेकिन तेजी ने अपने बच्चों को सिख बनाए रखने की कोई चेष्टा नहीं की। श्रीवास्तव परंपरा के अनुसार अमित का चौल-कर्म (मुंडन संस्कार) विंध्य पर्वत पर देवी की प्रतिमा के आगे बकरे की बलि के साथ होना चाहिए था, मगर बच्चन जी ने ऐसा कुछ नहीं किया। दुर्योग देखिए कि बालक अमित के मुंडन के दिन ही एक सांड उनके द्वार पर आया और अमित को पटकनी देकर चला गया। अमित रोया नहीं, जबकि उसके सिर में गहरा जख्म हुआ था और कुछ टाँके भी लगे थे। वे इतना ज़रूर कहते हैं कि यह भिड़ंत उनकी उस सहनशक्ति का 'ट्रायल रन' थी, जिसे उन्होंने अपनी आगे की ज़िदगी में विकसित किया।[1]

विवाह

अमिताभ पत्नी जया भादुडी के साथ

अमिताभ बच्चन का विवाह 3 जून, 1973 को बंगाली संस्कार के अनुसार अभिनेत्री जया भादुड़ी से हुआ। अभिनेत्री के रूप में जया की भी अपनी विशिष्ट उपलब्धियाँ रही हैं और वे फ़िल्म क्षेत्र की आदरणीय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। आज के अनेक युवा कलाकारों के लिए वे मातृवत स्नेह का झरना हैं। रचनात्मकता को बढ़ावा देना उनका स्वभाव तथा जीवन का ध्येय है। अभिनय से उन्हें दिली-लगाव है। वे कई वर्षों तक 'चिल्ड्रन्स फ़िल्म सोसायटी' की अध्यक्ष रह चुकी हैं। रमेश तलवार के नाटक 'माँ रिटायर होती है' के माध्यम से रंगकर्म की दुनिया में उन्होंने अपनी सनसनीखेज वापसी दर्ज की थी। सत्तर के दशक में उन्होंने फ़िल्म 'कोरा काग़ज़' (1975) और 'नौकर' (1980) में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त किए थे। जया और अमिताभ का परिचय ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फ़िल्म 'गुड्डी' के सेट पर कराया था।

संतान

अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी की दो संतान हैं, श्वेता बच्चन नंदा और अभिषेक बच्चन। अभिषेक बच्चन भी एक अभिनेता हैं, जिनका विवाह प्रसिद्ध अभिनेत्री ऐश्वर्या राय से हुआ है। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या हैं। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन इनके दादाजया बच्चन इनकी दादी हैं। बच्चन परिवार की इस 'नन्ही परी' का जन्म मुंबई के अंधेरी मे स्थित सेवेन हिल्स अस्पताल में 17 नवंबर, 2011 को हुआ।

शिक्षा

अमिताभ बच्चन ने दो बार एम. ए. की उपाधि ग्रहण की है। इन्होंने इलाहाबाद के ज्ञान प्रबोधिनी और बॉयज़ हाई स्कूल (बी.एच.एस.) तथा उसके बाद नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढाई की, जहाँ कला संकाय में प्रवेश दिलाया गया। उसके बाद अध्ययन करने के लिए ये दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज चले गए जहाँ इन्होंने विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की। अपनी आयु के 20 के दशक में बच्चन ने अभिनय में अपना कैरियर आजमाने के लिए कोलकता की एक शिपिंग फर्म 'बर्ड एंड कंपनी' में किराया ब्रोकर की नौकरी छोड़ दी।

कोलकाता में प्रवास

अमिताभ अपने बच्चों (अभिषेक और श्वेता) के साथ

मुंबई जाने से पहले अमिताभ बच्चन ने 1963 और 1968 के बीच साढ़े पाँच साल कलकत्ता, वर्तमान कोलकाता में व्यतीत किये। इस बीच उन्होंने दो प्राइवेट कंपनियों में एक़्ज़ीक्यूटिव के रूप में काम किया। नौकरी वे दिल लगाकर करते थे, लेकिन साथ ही थिएटर, सिनेमा का शौक़ भी चलता रहता। अमिताभ का कलकत्ता निवास नियति ने शायद उनकी अभिनय प्रतिभा निखारने के लिए ही रचा था, क्योंकि वहाँ अमिताभ ने रंगकर्म में सक्रिय भागीदारी की। साथ ही वे खेलों का शौक़ भी पूरा करते रहे। कोयले का व्यवसाय करने वाली 'बर्ड एंड हिल्जर्स' कंपनी में उनका पहला वेतन पाँच सौ रुपए माह था, जबकि दूसरी कंपनी 'ब्लैकर्स' में उनका अंतिम वेतन 1680 रुपए मात्र था।

कलकत्ता पहली बार

अमिताभ पहली बार 1954 में माता-पिता के साथ कलकत्ता आए थे। तब वे 12 साल के थे। तब उन्होंने भरी बरसात में एक फुटबॉल मैच देखा था और वे इस शहर पर मुग्ध हो गए थे। अपना कर्म-जीवन शुरू करने के लिए 1963 में जब वे फिर इस शहर में आए तो यह नगर बहुत बदला-बदला था। भागमभाग और चकाचौंध बढ़ गई थी। शुरू में कुछ दिन वह अपने पिता के मित्र के घर टालीगंज में ठहरे और नौकरी मिलने के बाद कार्यस्थल के आसपास ही पेइंगगेस्ट या दोस्तों के साथ किराए के मकान में रहने लगे। शेरवुड में उन्होंने स्वतंत्रता की साँस ली थी, तो कलकत्ता में वे अपने पैरों पर खड़ा होने आए थे। इस बीच डेढ़ साल दोनों भाई साथ भी रहे। दोनों का रहन-सहन उच्च स्तरीय था। दोनों भाइयों के सम्बंध मित्रवत थे। अजिताभ अपने 'दादा' की अभिनय प्रतिभा से बहुत प्रभावित थे। दोनों 'मुम्बइया मसाला सिनेमा' के कटु आलोचक थे। अमिताभ के थिएटर के शौक़ के अजिताभ साक्षी थे और साथ ही दादा के भावी कैरियर के सपने भी बुन रहे थे। अभिनेता बनने के आकांक्षी अमिताभ बच्चन का पहला फ़ोटो एलबम अजिताभ ने ही तैयार किया था और स्वयं उन्होंने ही अमिताभ की तस्वीरें खींची थीं।

नाटकों में अभिनय

साठ के दशक में गैर-सरकारी कंपनियों में काम करने वाले कुछ नौजवानों ने, जो स्वयं को 'बॉक्सवाला' कहते थे, एक नाटक मंडली क़ायम की- 'द ऍमेचर्स।' अधिकारी-वर्ग के इन नौजवानों की विदेशी नाटकों में दिलचस्पी थी। उस समय कलकत्ता में 'द ड्रामेटिक क्लब' नामक एक अन्य नाटक मंडली भी अंग्रेज़ी नाटक खेलती थी, लेकिन उसमें किसी भारतीय का प्रवेश-निषिद्ध था। 'द ऍमेचर्स क्लब' इसी का प्रतिकार था। दिसंबर 1960 में जन्मी इस नाटक मंडली के काम की शुरुआत धीमी रही, लेकिन अगले वर्ष इसके दो नाटकों[2] ने तहलका मचा दिया।

सौदागर के एक दृश्य में अमिताभ और नूतन

ऍमेचर्स के संस्थापक सदस्यों में डिक रॉजर्स, दिलीप सरकार, जगबीर मलिक, विमल और कमल भगत जैसे आठ - नौ लोग ही थे। 1962-63 में यह आँकड़ा साठ के क़रीब पहुँच गया। अगले 3-4 वर्षों में सदस्य संख्या सौ तक हो गई। अमिताभ और उनके मित्र 'विजय कृष्ण' 1965 में ऍमेचर्स में दाख़िल हुए। उस समय अमिताभ 'बर्ड' की नौकरी छोड़कर 'ब्लैकर्स' में पहुँच चुके थे। विजय कृष्ण 'इंडिया स्टीमशिप' में थे। कुछ ही दिनों बाद किशोर भिमानी भी इस संस्था में दाख़िल हुए और दो वर्ष बाद 1967 में उन्होंने 'द क्वीन एंड द रिबेल' नाटक का निर्देशन किया। अमिताभ ने इस नाटक के स्टेज मैनेजर की ज़िम्मेदारी निभाई थी।[3]

नौकरी छोड़ने का निर्णय

हीरो बनने की धुन में इतनी अच्छी नौकरी छोड़ने के अमिताभ के निर्णय को उनके दोस्तों ने उस समय उचित नहीं माना था। अमिताभ के लिए यह किस्मत दाँव पर लगाने का सबसे अच्छा अवसर था। माता-पिता की तरफ से वह निश्चिंत हो चुके थे। केंद्र में श्रीमती गाँधी का शासन था और उनके पिता डॉ. बच्चन राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हो गए थे। भाई बंटी (अजिताभ) डेढ़ साल कलकत्ता में उनके साथ रह चुके थे और 'शॉ वॉलेस' की नौकरी करते हुए वे कलकत्ता से मद्रास और फिर मुंबई पहुँच चुके थे। मुंबई में नर्गिस और सुनील दत्त का सहारा भी था, जो उनके पारिवारिक मित्र थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अमिताभ का बचपन (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 10 दिसम्बर, 2011।
  2. ऑर्थर मिलर का 'ए व्यू फ्रॉम द ब्रिज' और शेक्सपीयर के 'जूलियस-सीजर'
  3. अमिताभ : कलकत्ता के वो साढ़े पाँच साल (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 10 दिसम्बर, 2011।
  4. सात हिन्दुस्तानी
  5. जीरो थे हीरो अमिताभ (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 10 दिसम्बर, 2011।
  6. क्रुद्ध नौजवान
  7. आवाज़ का जादू चल गया (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 16 दिसम्बर, 2012।
  8. बहुतों के आदर्श हैं अमिताभ बच्चन, उनके आदर्श दिलीप कुमार (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 10 दिसम्बर, 2011।

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