विश्व आघात दिवस  

विश्व आघात दिवस
विवरण 'विश्व आघात दिवस' प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को मनाया जाता है। जीवन को सबसे नाज़ुक समय के दौरान बचाने और सुरक्षा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने तथा आघात से होने वाली मृत्यु से बचाने व बचने के लिये पूरे विश्व में यह मनाया जाता है।
उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को किसी भी मानसिक या शारीरिक चोट के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना।
तिथि 17 अक्टूबर
संबंधित लेख विश्व स्वास्थ्य दिवस
अन्य जानकारी जनवरी, 2016 से सितंबर तक करीब छह सौ लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2014 में यहां दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 546 थी। यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस से प्राप्त हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हादसों से बचने के लिए अगर वाहन चालक सिर्फ ट्रैफिक नियम का पालन करें तो 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
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विश्व आघात दिवस (अंग्रेज़ी: World Trauma Day) प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व आघात दिवस जीवन को सबसे नाज़ुक क्षणों के दौरान बचाने और सुरक्षा के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने तथा आघात से होने वाली मृत्यु से बचने की तैयारी एवं महत्वपूर्ण उपायों को अपनाने के लिए मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार विश्वभर में मृत्यु एवं विकलांगता का प्रमुख कारण आघात है। आघात का मतलब "किसी भी तरह की शारीरिक एवं मानसिक चोट हो सकती है"। इस तरह की चोटों के कारणों की कई वज़ह जैसे कि सड़क दुर्घटना, आग, जलना, गिरना, प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाएँ और हिंसक कृत्य तथा कमज़ोर आबादी “महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों” के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध हो सकते हैं। इन सभी कारणों के मध्य विश्वभर में आघात का प्रमुख कारण सड़क यातायात दुर्घटना (आरटीए) है। कई तरह की चोट अस्थायी या स्थायी विकलांगता को पैदा करती है। जबकि अन्य तरह की चोट मृत्यु का कारण भी हो सकती है।[1]

भारत में हर छह मिनट पर एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना के कारण मौत का शिकार हो जाता है। दिल्ली की सड़कों पर फर्राटा भर रहे वाहनों ने वर्ष 2015 में छह सौ से अधिक लोगों की जान ले ली। वहीं आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से सितंबर तक करीब छह सौ लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2014 में यहां दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 546 थी। यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस से प्राप्त हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हादसों से बचने के लिए अगर वाहन चालक सिर्फ ट्रैफिक नियम का पालन करें तो 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।[2]

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर संजय बिहारी और प्रो.अरुण श्रीवास्तव के अनुसार सड़क हादसों के कारण होने वाली मौत में 70 फीसद लोगों की आयु 45 साल से कम होती है। सड़क दुर्घटना से लोगों को निजी व व्यावसायिक चालकों के व्यवहार में परिवर्तन लाकर, वैरियर, गति अवरोधक, सीट बेल्ट व हेलमेट लगाने की बाध्यता, चिकित्सकीय व आकस्मिक सेवाओं में सुधार, ब्रेथ (शराब पीने) परीक्षण सहित दूसरे उपायों पर जोर देकर ही बचाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में हर साल दस लाख लोग हेड इंजरी के शिकार होते हैं, जिनमें से 75 से 80 फीसद लोगों में सड़क दुर्घटना के कारण होती है। हेड इंजरी के शिकार 50 फीसद लोग मर जाते हैं तो 25 फीसद लोग विकलांग हो जाते हैं। यह आंकड़े आपको डराने के लिए नहीं बल्कि सचेत करने के लिए बताए जा रहे हैं। इन आंकड़ों में आप की सावधानी कमी ला सकती है। पिछले दो दशकों में सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौत व बीमारियों में 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।[2]

विश्व आघात दिवस

सड़क दुर्घटना के कारण मौतें

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हर साल जितने लोग बीमार होते हैं उनमें से 2.6 प्रतिशत लोग सड़क दुर्घटना के कारण बीमार होते हैं।
  • प्रतिवर्ष कुल जितनी मौत होती हैं उनमें से 23 प्रतिशत लोग सड़क दुर्घटना के शिकार होते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के कुल 41 फीसद मामलों में वाहन की तेज गति मौत का कारण बनता है।
  • सड़क दुर्घटना के कारण मौत के शिकार होने वाले 30 फीसद मामलों में दो पहिया वाहन होते है और साइकिल तीन फीसद होती है।
  • हेलमेट पहने से सिर पर गंभीर चोट की आशंका 72 फीसद और मौत की आशंका 39 फीसद तक कम हो जाती है।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 विश्व ट्रॉमा दिवस (हिन्दी) hi.nhp.gov.in। अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर, 2016।
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 2.4 2.5 2.6 विश्व ट्रॉमा दिवस (हिन्दी) patrika.com। अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर, 2016।

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