विनोबा भावे  

विनोबा भावे
पूरा नाम विनायक नरहरि भावे
जन्म 11 सितंबर, 1895
जन्म भूमि गाहोदे, गुजरात, भारत
मृत्यु 15 नवम्बर, 1982
मृत्यु स्थान वर्धा, महाराष्ट्र
अभिभावक नरहरि भावे
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, समाज सुधारक
भाषा मराठी, संस्कृत, हिंदी, अरबी, फ़ारसी, गुजराती, बंगला, अंग्रेज़ी, फ्रेंच आदि।
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न, प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
विशेष योगदान भूदान आंदोलन द्वारा समाज में भूस्वामियों और भूमिहीनों के बीच की गहरी खाई को पाटने का एक अनूठा प्रयास किया।
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख पवनार आश्रम, भूदान आन्दोलन, विनोबा भावे के अनमोल वचन, विनोबा भावे के प्रेरक प्रसंग
आंदोलन 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे।
जेल यात्रा 1920 और 1930 के दशक में भावे कई बार जेल गए और 1940 में उन्हें पाँच साल के लिए जेल जाना पड़ा।
अन्य जानकारी इन्हें 'भारत का राष्ट्रीय अध्यापक' और महात्मा गांधी का 'आध्यात्मिक उत्तराधिकारी' समझा जाता है।
बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक वेबसाइट

विनोबा भावे (अंग्रेज़ी: Vinoba Bhave, जन्म: 11 सितंबर, 1895; मृत्यु: 15 नवम्बर 1982) महात्मा गांधी के आदरणीय अनुयायी, भारत के एक सर्वाधिक जाने-माने समाज सुधारक एवं 'भूदान यज्ञ' नामक आन्दोलन के संस्थापक थे। इनकी समस्‍त ज़िंदगी साधु संयासियों जैसी रही, इसी कारणवश ये एक संत के तौर पर प्रख्‍यात हुए। विनोबा भावे अत्‍यंत विद्वान एवं विचारशील व्‍यक्तित्‍व वाले शख्‍स थे। महात्मा गाँधी के परम शिष्‍य 'जंग ए आज़ादी' के इस योद्धा ने वेद, वेदांत, गीता, रामायण, क़ुरआन, बाइबिल आदि अनेक धार्मिक ग्रंथों का उन्‍होंने गहन गंभीर अध्‍ययन मनन किया। अर्थशास्‍त्र, राजनीति और दर्शन के आधुनिक सिद्धांतों का भी विनोबा भावे ने गहन अवलोकन चिंतन किया गया।[1]

जीवन परिचय

विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को गाहोदे, गुजरात, भारत में हुआ था। विनोबा भावे का मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। एक कुलीन ब्राह्मण परिवार जन्मे विनोबा ने 'गांधी आश्रम' में शामिल होने के लिए 1916 में हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। गाँधी जी के उपदेशों ने भावे को भारतीय ग्रामीण जीवन के सुधार के लिए एक तपस्वी के रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।

प्रारम्भिक जीवन

विनायक की बुद्धि अत्‍यंत प्रखर थी। गणित उसका सबसे प्‍यारा विषय बन गया। हाई स्‍कूल परीक्षा में गणित में सर्वोच्‍च अंक प्राप्‍त किए। बड़ौदा में ग्रेजुएशन करने के दौरान ही विनायक का मन वैरागी बनने के लिए अति आतुर हो उठा। 1916 में मात्र 21 वर्ष की आयु में गृहत्‍याग कर दिया और साधु बनने के लिए काशी नगरी की ओर रूख किया। काशी नगरी में वैदिक पंडितों के सानिध्‍य में शास्‍त्रों के अध्‍ययन में जुट गए। महात्मा गाँधी की चर्चा देश में चारों ओर चल रही थी कि वह दक्षिणी अफ्रीका से भारत आ गए हैं और आज़ादी का बिगुल बजाने में जुट गए हैं। अखंड स्‍वाध्‍याय और ज्ञानाभ्‍यास के दौरान विनोबा का मन गाँधी जी से मिलने के लिए किया तो वह पंहुच गए अहमदाबाद के कोचरब आश्रम में। जब पंहुचे तो गाँधी जी सब्‍जी काट रहे थे। इतना प्रख्‍यात नेता सब्‍जी काटते हुए मिलेगा, ऐसा तो कदाचित विनोबा ने सोचा न था। बिना किसी उपदेश के स्‍वालंबन और श्रम का पाठ पढ़ लिया। इस मुलाकात के बाद तो जीवन भर के लिए वह बापू के ही हो गए।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 1.4 विनोबा भावे (हिन्दी) The Realty of India। अभिगमन तिथि: 22 जून, 2013।
  2. महान विचारक और समाज सुधारक विनोबा भावे (हिन्दी) जागरण जंक्शन। अभिगमन तिथि: 22 जून, 2013।

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