चन्द्र ग्रहण  

चन्द्र ग्रहण
विवरण चन्द्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी के आ जाने की खगोलीय घटना को ही चन्द्र ग्रहण कहते हैं।
सर्वग्रास चन्द्र ग्रहण पूरा चन्द्रमा ढक जाने पर सर्वग्रास चन्द्र ग्रहण कहलाता है।
खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण आंशिक रूप से चन्द्रमा ढक जाने पर 'खण्डग्रास (उपच्छाया) चन्द्रग्रहण' कहलाता है।
विशेष चन्द्र ग्रहण को सूर्य ग्रहण के विपरीत किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के बिना नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है, क्योंकि चन्द्र ग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चन्द्र से भी कम होती है।
वर्ष 2021 26 मई तथा 19 नवंबर
संबंधित लेख सूर्य ग्रहण, सुपरमून, ब्लू मून, ब्लड मून
अन्य जानकारी पृथ्वी की छाया सूर्य से 6 राशि के अन्तर पर भ्रमण करती है तथा पूर्णिमा को चन्द्रमा की छाया सूर्य से 6 राशि के अन्तर होते हुए जिस पूर्णमासी को सूर्य एवं चन्द्रमा दोनों के अंश, कला एवं विकला पृथ्वी के समान होते हैं अर्थात् एक सीध में होते हैं, उसी पूर्णमासी को चन्द्र ग्रहण लगता है।
चन्द्र ग्रहण (अंग्रेज़ी: Chandra Grahan / Lunar eclipse) एक खगोलीय घटना है। जब सूर्यचन्द्रमा के बीच पृथ्वी इस प्रकार से आ जाती है कि पृथ्वी की छाया से चन्द्रमा का पूरा या आंशिक भाग ढक जाता है। जब इस स्थिति में पृथ्वी सूर्य की किरणों के चन्द्रमा तक पहुँचने में अवरोध लगा देती है तो पृथ्वी के उस हिस्से में चन्द्र ग्रहण नज़र आता है। इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चन्द्र ग्रहण केवल पूर्णिमा की रात्रि को घटित हो सकता है। चन्द्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी के आ जाने की खगोलीय घटना को ही चन्द्र ग्रहण कहते हैं।

वर्ष 2021

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, वर्ष 2021 में दो चन्द्र ग्रहण लगेंगे-

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 31 जनवरी को एक ही रात में दिखेगा 'सुपर ब्लड ब्लू मून' (हिंदी) फ़र्स्ट पोस्ट। अभिगमन तिथि: 30 जनवरी, 2018।

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