आकाशगंगा  

आकाशगंगा (गैलेक्सी) असंख्य तारों का समूह है जो स्वच्छ और अँधेरी रात में, आकाश के बीच से जाते हुए अर्धचक्र के रूप में और झिलमिलाती सी मेखला के समान दिखाई पड़ती है। यह मेखला वस्तुत: एक पूर्ण चक्र का अंग हैं जिसका क्षितिज के नीचे का भाग नहीं दिखाई पड़ता। भारत में इसे 'मंदाकिनी', 'स्वर्णगंगा', 'स्वर्नदी', 'सुरनदी', 'आकाशनदी', 'देवनदी', 'नागवीथी', 'हरिताली' आदि भी कहते हैं।

स्थिति

हमारी पृथ्वी और सूर्य जिस 'आकाशगंगा' में अवस्थित हैं, रात्रि में हम नंगी आँख से उसी आकाशगंगा के ताराओं को देख पाते हैं। अब तक ब्रह्मांड के जितने भाग का पता चला है उसमें लगभग ऐसी ही 19 अरब आकाशगंगाएँ होने का अनुमान है। ब्रह्मांड के 'विस्फोट सिद्धांत' (बिग बंग थ्योरी आफ युनिवर्स) के अनुसार सभी आकाशगंगाएँ एक दूसरे से बड़ी तेज़ीसे दूर हटती जा रही हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्व कोश
  2. गोरख प्रसाद कृत 'नीहारिकाएँ' (बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्),
  3. बोक एवं बोक कृत 'द मिल्की वे' (1954)।

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