भारतकोश के संस्थापक/संपादक के फ़ेसबुक लाइव के लिए यहाँ क्लिक करें।

अम्बुवासी मेला  

देवी कामख्या का विश्व प्रसिद्ध मेला
भारत के असम प्रदेश में शक्तिपीठ की आराध्य देवी आदिशक्ति भगवती कामाख्या का हैं। कहते हैं कि योगि मत्स्येन्द्रनाथ ने इस शक्तिपीठ में निवास करके देवी का दर्शन प्राप्त किया था। यहाँ का सबसे बड़ा व्रतोत्सव "अम्बुवाची" नामक व्रत है। नरकासुर नामक राक्षस, देवी कामाख्या से प्रेम कर बैठा। वह उनसे विवाह करना चाहता था। देवी असुर या राक्षस से विवाह नहीं करना चाहती थीं। अतः उन्होंने स्वयं की रक्षा हेतु एक तरक़ीब सोची। उन्होंने नरकासुर के समक्ष एक शर्त रखी कि उसे एक ही रात में देवी का मन्दिर निर्मित करना होगा। नरकासुर मान गया तथा उसने एक ही रात में मन्दिर का निर्माण लगभग पूर्ण कर लिया। इससे देवी व्याकुल हो उठीं तथा इससे पहले की मन्दिर की अन्तिम सीढ़ी बनकर तैयार हो, एक मुर्गें को प्रातः आगमन की सूचना देने भेजा गया। उषा तो अभी हुई नहीं थी। लेकिन मुर्गे की वांग को सुनकर नरकासुर ने सोचा कि सुबह हो गयी है। इससे नरकासुर क्रोधित हो उठा तथा उसने वहीं पर उस मुर्गे की हत्या कर दी। नरकासुर शर्त के अनुसार देवी से विवाह नहीं कर सका। ऐसा विश्वास किया जाता है कि आज का 'कामाख्या मन्दिर' नरकासुर द्वारा निर्मित वह मन्दिर ही है। इसी मन्दिर में अम्बुवासी मेले का आयोजन किया जाता है।

धार्मिक मेला

अम्बुवासी मेला भारत में मनाए जाने वाले अनगिनत धार्मिक मेलों में से एक है। इसे बहुत श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस मेले का आयोजन प्रतिवर्ष मानसून ऋतु में कामाख्या मन्दिर में किया जाता है। देश–विदेश से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु इस मेले में भाग लेने के लिए आते हैं। मेले के अवसर पर अनेक प्रकार के तांत्रिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://amp.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=अम्बुवासी_मेला&oldid=598062" से लिया गया