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	<title>आन - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>यशी चौधरी: ''''आन''' (1703-1749); रूस की सम्राज्ञी, महान्‌ पीटर के भाई ईवान...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2018-06-13T07:24:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;आन&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (1703-1749); रूस की सम्राज्ञी, महान्‌ पीटर के भाई ईवान...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''आन''' (1703-1749); रूस की सम्राज्ञी, महान्‌ पीटर के भाई ईवान पंचम की पुत्री। मास्को के निकटस्थ इसमाइलोर्वा में मां के पास प्राचीन रीति रस्मों के बीच बचपन उपेक्षा और घृणा में बीता। बाद में पीटर ने इसकी संरक्षता ग्रहण की। 1710 में कूरलैंड के ड्यूक फ्रेडरिक विलियम से विवाह हुआ लेकिन पति लेनिनग्राड से घर जाते हुए रास्ते में मर गया। विधवा आन को कूरलैंड की शासिका बनाकर वहाँ रहने के लिए बाध्य किया गया। काउंट पीटर वेस्ट टूवे रूसी रेजीडेंट बनाया गया। यह इसके प्रेमियों में से एक था। बाद में वीरेन रेजीडेंट नियुक्त किया गया। पीटर द्वितीय के मरने पर आन रूस की साम्राज्ञी हुई।&amp;lt;ref&amp;gt;30 जनवरी, 1730&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
26 फरवरी को आन ने मास्को में प्रवेश किया। 9 मार्च को राज्य में विप्लव हुआ और प्रिवी कौंसिल (सरदार परिषद्) का अंत कर उसने अपने को 'ऑटोक्राट' घोषित कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आन वासना और क्रूरता की पुतली थी। हजारों को फाँसी दी गई और हजारों साइबेरिया को निर्वासित कर दिए गए। बौनों को दरबार में रखा और बागों और उद्यानों में हर किस्म के जानवर रखे, जिनपर राजमहल की खिड़की से यह गोली चलाती थी। लेकिन सरदारों पर से एक-एक करके प्रतिबंध उठ गए। 'कोर ऑव पाजेज़' की स्थापना की गई, जिसमें सरदारों तथा सामंतों के लड़के साधारण लोगों से पृथक्‌ उच्च सैनिक शिक्षा पाते थे। सैनिक सेवा की अवधि भी आजन्म की जगह 25 वर्ष कर दी गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु विदेशी संबंधों में आन को सफलता मिली और रूस की प्रतिष्ठा भी बढ़ी। क्रीमिया युद्ध (1736-39) साढ़े चार साल चला और अजोन शहर लेकर ही संतोष करना पड़ा, पर इससे उत्तमान साम्राज्य की अजेयता का विश्वास लुप्त हो गया। तातार लुटेरों का अंत हो गया। 'स्टेंपे' में सफलता मिलने से रूस की प्रतिष्ठा बढ़ी और इसके कारण यूरोप के मामले में रूस की बात ध्यान से सुनी जाने लगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
28 अक्टूबर, 1740 को इसकी मृत्यु हुई। इससे पहले इसने अपने चचेरे दौहित्र इवान षष्ठ को अपना उत्तराधिकारी बनाया और वोरेन को उसका रीजेंट नियुक्त किया।&amp;lt;ref&amp;gt;{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1|लेखक= |अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक= नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी|संकलन= भारत डिस्कवरी पुस्तकालय|संपादन= |पृष्ठ संख्या=375 |url=}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]][[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>यशी चौधरी</name></author>
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